






*सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।* *शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥*
भावार्थ :
हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगल मयी हो। कल्याण दायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थो को सिद्ध करने वाली, शरणागत वत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो। तुम्हें नमस्कार है।
*सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।* *मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:॥*
भावार्थ :
मनुष्य मेरे प्रसाद से सब बाधाओं से मुक्त तथा धन, धान्य एवं पुत्र से सम्पन्न होगा इसमें तनिक भी संदेह नहीं है।
*सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।* *एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥*
भावार्थ :
हे सर्वेश्वरि! तुम इसी प्रकार तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शान्त करो और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहो।
*जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतापहारिणि ।*
*जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते ॥*
भावार्थ :
नामों से प्रसिद्ध जगदम्बिके ! तुम्हें मेरा नमस्कार हो । देवी चामुण्डे ! तुम्हारी जय हो । सम्पूर्ण प्राणियों की पीड़ा हरनेवाली देवी ! तुम्हारी जय हो । सबमें व्याप्त रहनेवाली देवी ! तुम्हारी जय हो । कालरात्रि ! तुम्हें नमस्कार हो ॥
*देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।*
*रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥*
भावार्थ :
हे देवी मुझे सौभाग्य और आरोग्य दो। परम सुख दो, रूप दो, जय दो, यश दो और काम क्रोध आदि शत्रुओं का नाश करो।
*शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।* *सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥*
भावार्थ :
शरण में आये हुए दिनों एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहने वाली तथा सबकी पीड़ा दूर करने वाली नारायणी देवी ! तुम्हें नमस्कार है ।
*महिषासुरनिर्नाशि भक्तानां सुखदे नमः ।*
*रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥*
भावार्थ :
महिषासुर का नाश करनेवाली तथा भत्तों को सुख देने वाली देवि ! तुम्हें नमस्कार है । तुम रूप दो, यश दो और काम- क्रोध आदि शत्रुओं का नाश करो ।
*दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।*
*दारिद्र्य दु:ख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता ॥*
भावार्थ :
हे माँ दुर्गे! आप स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ पुरषों द्वारा चिन्तन करने पर उन्हें परम कल्याण मयी बुद्धि प्रदान करती हैं। दु:ख, दरिद्रता और भय हरने वाली देवि आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सब का उपकार करने के लिये सदा मचलता रहता हुं l
*जय माता दी*



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