1)१० वी -१२ वी गुणपत्रिकेसाठी 👉 क्लीक करा
2)शाळेचा U-DISE कोड शोधा 👉 क्लिक करा
3) शोध करिअरचा अधिक माहितीसाठी 👉 क्लिक करा
4)१२ वी नंतर काय ..? अधिक माहितीसाठी 👉 क्लिक करा
5)पोलीस भरतीची तयारी करताय .. ? 👉 क्लिक करा
7)केंद्रीय लोकसेवा आयोग (UPSC)
9)महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद
10)उच्च शिक्षण संचालनालय ,महाराष्ट्र राज्य ,पुणे
11)यशदा, पुणे
15)NCERT
16)MSCERT
17) मिशन MPSC
18)माय MPSC
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7) पंचतंत्र
14)सामान्यज्ञान
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*SNOWFLAKE*
*तिरंगी बिल्ला*
*कागदी फुलपाखरू*
*कागदी फुले*
*PAPER HEART*
*कागदी दीवा*
*डेकोरेशनसाठी कागदी दीवा*
*पेपर ब्रेसलेट*
*वर्तमान पत्रा पासून पेनस्टॅंड तयार करणे*
*गिफ्ट बॉक्स*
*कागदी विमान*
*BIRD AIRPLANE*
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निर्मिती - *योगिता लोखंडे* (धरणगाव)
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अति महत्वाची माहिती
प्रमाणपत्रासाठी लागणारे आवश्यक कागदपत्र
1.उत्पन्न दाखला
१) तलाठी अहवाल,
२) आधार कार्ड,
३) नौकरी असल्यास १६ नंबर फॉम
2.रहिवाशी / अधिवास / राष्ट्रीयत्व प्रमाणपत्र
१) शाळेची टिसी किंवा जन्म नोंद प्रमाणपत्र,
२) आधार कार्ड (अर्जदार व विद्यार्थी)
3.शेतकरी प्रमाणपत्र
१) ७/१२ व गाव नमुना ८ अ,
२) आधार कार्ड
4.अल्प भुधारक प्रमाणपत्र
१) ७/१२ व गाव नमुना ८ अ,
२) आधार कार्ड
5.ऐपत प्रमाणपत्र
१) मुल्याकंन,
२) ७/१२ किंवा असेसमेन्ट नक्कल,
३) आधार कार्ड,
6.भुमीहिन प्रमाणपत्र
१) तलाठी अहवाल,
२) आधार कार्ड
7. (SEC ) प्रमाणपत्र (१५ वर्ष रहीवाशी)
१) शाळेची टिसी किंवा जन्मनोंद,
२) आधार कार्ड
8.EWS प्रमाणपत्र (खुला)
१) विद्यार्थ्याची टिसी,
२) १९६७ पुर्वीचा जात नमुद असणारा पुरावा (वडीलाची टिसी, आजोबाची टिसी द्र किंवा कोतवाल बुक नक्कल,
३) वडीलाचा उत्पन्न दाखला ८ लाखाचे आत, ४) आधार कार्ड (वडील व विद्यार्थी) (केंद्रीय EWS प्रमाणपत्र काढवयाचे असल्यास गृहचौकशी अहवाल.)
9.मराठा EWS प्रमाणपत्र
१)SEBC मराठा जातीचा दाखला,
२) वडीलाचा उत्पन्न दाखला ८ लाखाचे आत, ३) आधार कार्ड (वडील व , विद्यार्थी), ४)SEBC प्रमाणपत्राचा लाभ घेणार नसल्याचे स्वयंघोषणापत्र (केंद्रीय EWS प्रमाणपत्र
'काढावयाचे असल्यास गृहचौकशी अहवाल)
10. ३०% महिला आरक्षण
१) विहीत नमुन्यात अर्ज,
२) उत्पन्न दाखला,
३) शाळेची टिसी,
४) आधार कार्ड
11.नॉनक्रिमिलेयर प्रमाणपत्र
१) शाळा सोडल्याचा दाखला विद्यार्थ्याचा,
२) जातीचा दाखला विद्यार्थ्याचा,
३) अधिवास प्रमाणपत्र ल विद्यार्थ्याचा,
४) ३ वर्षाचा उत्पन्न दाखला वडीलांचा
12.जातीचे प्रमाणपत्र
१) शाळा सोडल्याचा दाखला स्वतः व वडील, २) आजोबाची टिसी किंवा निर्गम उतारा,
३) वडील आजोबाअशिक्षीत असल्यास प्रतिज्ञापत्र,
४) कोतवाल बुकाची नक्कल / हक्कनोंदणी / पेरेपत्रक,
५) आधारकार्ड, मतदानकार्ड, राशनकार्ड,
६) कोतवाल बुक नक्कल ज्या गावची आहे त्या गावच्या पोलीस पाटलाचा चौकशी अहवाल,
७) ३ फोटो
13.केंद्रीय OBC प्रमाणपत्र
१) शाळा सोडल्याचा दाखला स्वतः व वडीलाचा,
२) जातीचे प्रमाणपत्र व नॉनक्रिमीलीयर स्वतःचे ३) उत्पन्न ड दाखला ३ वर्षाचा,
४) अधिवास प्रमाणपत्र स्वतःचे,
५) आधारकार्ड, मतदानकार्ड व राशनकार्ड,
६) कोतवाल बुकाची नक्कल,
७) तिन फोटो अर्जदाराचे
(टीप- वरील दाखले काढण्यासाठी अर्जदार यांचे पासपोर्ट साईज कलर फोटो आवश्यक)
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*मेडीकल* प्रवेशासाठी लागणारी कागदपत्रे*
*इंजिनीअरिंग* प्रवेशासाठी लागणारी कागदपत्रे

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1) *नीट* आँनलाईन *फाँर्म* प्रिंट
2) *नीटप्रवेश* पत्र
3) *नीट मार्क* लिस्ट
4)10 वी चा मार्क मेमो
5)10 वी सनद
6) 12वी मार्क मेमो
7) नँशनँलीटी सर्टीफिकेट
8 रहिवाशी प्रमाणपत्र
9)12 वी टी सी
10) मेडिकल सर्टिफिकेट फिटनेस
11) आधार कार्ड
12) उत्पन्न प्रमाणपत्र किंवा फाँर्म नं 16 वडिलांचा
13) मुलाचे राष्ट्रीय बँकेतील खाते
14) मुलाचे तसेच आई व वडिलांचे दोघांचे पँन कार्ड
मागासवर्गीयांसाठीवरील सर्व व खालील प्रमाणपत्रे
1) जातीचे प्रमाणपत्र
2) जात वैधता प्रमाणपत्र
3) नाँन क्रिमीलीयर प्रमाणपत्र
( मागील काढलेले असेल तर 31 मार्च2021 पर्यत लागू)
------------------------------ ----------------------
कृपया वरील कागदपत्रे अपुर्ण असतील तर त्वरीत पुर्ण करून घ्यावे.
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*इंजिनीअरिंग* प्रवेशासाठी लागणारी कागदपत्रे
------------------------------ ----------------------
1) *MHT-CET* आँनलाईन *फाँर्म* प्रिंट
2) MHT-CET* पत्र
3) MHT-CET* मार्क लिस्ट
4)10 वी चा मार्क मेमो
5)10 वी सनद
6) 12वी मार्क मेमो
7) नँशनँलीटी सर्टीफिकेट
8 ) रहिवाशी प्रमाणपत्र
9)12 वी टी सी
10) आधार कार्ड
11) उत्पन्न प्रमाणपत्र किंवा फाँर्म नं 16 वडिलांचा
12) राष्ट्रीय बँकेतील खाते 13) फोटो.
------------------------------ ----------------------
*मागासवर्गीयांसाठीवरील सर्व व खालील प्रमाणपत्रे*
------------------------------ ----------------------
1) जातीचे प्रमाणपत्र
2) जात वैधता प्रमाणपत्र
3) नाँन क्रिमीलीयर प्रमाणपत्र
( मागील काढलेले असेल तर 31 मार्च2021 पर्यत लागू)
कृपया वरील कागदपत्रे अपुर्ण असतील तर त्वरीत पुर्ण करून घ्यावे
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*वैद्यकीय क्षेत्र*
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - एमबीबीएस*
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र आणि NEETप्रवेश परीक्षा
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी
------------------------------ ----------------------
पुढील उच्च शिक्षण - एमडी, एमएस व इतर पदविका
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीएएमएस*
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी
------------------------------ ----------------------
पुढील उच्च शिक्षण - एमडी, एमएस व इतर पदविका
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीएचएमएस*
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी
------------------------------ ----------------------
पुढील उच्च शिक्षण - एमडी
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीयूएमएस*
कालावधी - पाच वर्षे सहा महिने
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी.
------------------------------ ----------------------
पुढील उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीडीएस*
कालावधी - चार वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, NEET
संधी कोठे? - स्वतःचा वैद्यकीय व्यवसाय, रुग्णालयात नोकरी
------------------------------ ----------------------
पुढील उच्च शिक्षण - एमडीएस
------------------------------ ---------------------
*शिक्षण - बीएससी फाँरेन्सिक सायन्स अँड सायबर सेक्युरिटी*
कालावधी - तीन वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, प्रवेश थेट
संधी कोठे? - सिबीआय,सीआयडी, न्याय सहायक संस्था, पोलीस,औद्योगिक क्षेत्र, संशोधन संस्था, नागरी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार इत्यादी.
–----------------------------- ------------------
*शिक्षण - बीएससी इन नर्सिंग*
कालावधी - चार वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र NEET
संधी कोठे? - रुग्णालयात नर्स म्हणून नोकरी .
------------------------------ ----------------------
पुढील उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीव्हीएससी ऍण्ड एएच*
कालावधी - पाच वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र NEET
संधी कोठे? - प्राणी, जनावर रुग्णालयात नोकरी, प्राणी संग्रहालय, अभयारण्यात नोकरी, स्वतःचा व्यवसाय
पुढील उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - डिफार्म*
------------------------------ ----------------------
कालावधी - तीन वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, थेट प्रवेश
संधी कोठे? - औषधनिर्मिती कारखान्यात नोकरी, स्वतःचा व्यवसाय.
------------------------------ ----------------------
पुढील उच्च शिक्षण - बीफार्म
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीफार्म*
कालावधी - चार वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, सीईटी
संधी कोठे? - औषध कंपनी किंवा औषध संशोधन संस्था इत्यादी ठिकाणी नोकरी, स्वतःचा व्यवसाय, नागरी सेवा परीक्षा
पुढील उच्च शिक्षण - एमफार्म
------------------------------
संरक्षण दलांत प्रवेशासाठी
------------------------------
केंद्रीय लोकसेवा आयोगामार्फत (यूपीएससी) वर्षातून एनडीए (एक) व एनडीए (दोन) अशा दोन वेळा लेखी परीक्षा होतात.
एअर फोर्स व नेव्हीसाठी जे उमेदवार राज्य शिक्षण मंडळाची किंवा मान्यताप्राप्त विद्यापीठाची बारावी परीक्षा भौतिकशास्त्र व गणित या विषयांसह उत्तीर्ण आहेत किंवा त्या परीक्षेस बसलेले आहेत, असे उमेदवार परीक्षेसाठी पात्र ठरतात.
वयोमर्यादा : साडेसोळा ते 19 वर्षांदरम्यान वय असलेले उमेदवार अर्ज करू शकतात.
------------------------------
*अभियांत्रिकी व ऑटोमोबाईल*
----------------------------- -
*शिक्षण - इंजिनिअरिंग डिप्लोमा*
कालावधी - तीन वर्षे
पात्रता व प्रवेश परीक्षा - बारावी शास्त्र, थेट दुसऱ्या वर्गात प्रवेश
संधी कोठे? - आयटी औद्योगिक क्षेत्रात, उद्योग किंवा व्यवसाय, स्वयंरोजगार
पुढील उच्च शिक्षण - बीईच्या दुसऱ्या वर्षात प्रवेश
*शिक्षण - बीई*
कालावधी - चार वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, सीईटी
संधी कोठे? - स्वतःचा व्यवसाय, आयटी, औद्योगिक क्षेत्र, संशोधन संस्था, नागरी सेवा परीक्षा, अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा
पुढील उच्च शिक्षण - एमई, एमटेक, एमबीए; तसेच जीआरई देऊन परदेशात एमएस
*शिक्षण - बीटेक*
कालावधी - चार वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, आयआयटी जेईई, एआयईईई
संधी कोठे? - औद्योगिक क्षेत्र, सरकारी उद्योग, खासगी उद्योग, संशोधन संस्था, आयटी क्षेत्र, नागरी सेवा व अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार
पुढील उच्च शिक्षण - एमई, एमटेक, एमबीए किंवा जीआरई देऊन परदेशात एमएस
शिक्षण - ऑटोमोबाईल अभियांत्रिकी पदवी -
कालावधी - चार वर्षे
पात्रता - बारावी शास्त्र, सीईटी
शिक्षण - ऑटोमोबाईल अभियांत्रिकी पदव्युत्तर शिक्षण
कालावधी - दोन वर्षे
पात्रता - बीई, ऑटोमोबाईल, मॅकेनिकल, उत्पादन, तत्सम शिक्षण.
------------------------------ --------------------
*कॉम्प्युटरमधील कोर्सेस*
------------------------------
डीओईएसीसी "ओ' लेव्हल
कालावधी - एक वर्ष ऊजएअउउ
डिप्लोमा इन ऍडव्हान्स्ड सॉफ्टवेअर टेक्नॉलॉजी
कालावधी - दोन वर्षे
सर्टिफिकेट कोर्स इन इन्फर्मेशन टेक्नॉलॉजी
कालावधी - सहा महिने
सर्टिफिकेट इन कॉम्प्युटर ऍप्लिकेशन
कालावधी - तीन महिने
सर्टिफिकेट इन कॉम्प्युटिंग
कालावधी - दहा महिने
इग्नू युनिव्हर्सिटी
सर्टिफिकेट कोर्स इन कॉम्प्युटर प्रोग्रॅमिंग
कालावधी - एक वर्ष
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बारावी*
----------------------------- -
*शास्त्र कॉम्प्युटर ऍप्लिकेशन*
कालावधी - एक वर्ष
वेब डिझाईनिंग ऍण्ड वेब डेव्हलपमेंट
कालावधी - दोन महिने
कॉम्प्युटर ऑपरेटर ऍण्ड प्रोग्रॅम असिस्टन्स
कालावधी - एक वर्ष
(फक्त मुलींसाठी)
डिप्लोमा इन ऍडव्हर्टायझिंग ऍण्ड ग्राफिक डिझाईनिंग
कालावधी - दोन वर्षे
गेम डिझाईन ऍण्ड डेव्हलपमेंट
कालावधी - एक वर्ष
प्रिंट इमेजिंग ऍण्ड पब्लिशिंग, कार्टून ऍनिमेशन, ई-कॉम डेव्हलपमेंट, वेब ग्राफिक्स ऍण्ड ऍनिमेशन
कालावधी - एक वर्ष
कॉम्प्युटर ऑपरेटर ऍण्ड प्रोग्रॅमिंग असिस्टंट
कालावधी - एक वर्ष
डेस्क टॉप पब्लिशिंग ऑपरेटर
कालावधी - एक वर्ष
------------------------------
*रोजगाराभिमुख कोर्सेस*
----------------------------- -
*शिक्षण - डिप्लोमा इन प्लॅस्टिक मोल्ड टेक्नॉलॉजी*
कालावधी - तीन वर्षे
पात्रता - बारावी (70 टक्के)
संधी कोठे? - प्लॅस्टिक आणि मोल्ड
इंडस्ट्रीमध्ये संधी, सिंगापूर, मलेशियामध्ये संधी
उच्च शिक्षण - पदव्युत्तर शिक्षण
कोठे? सेंट्रल इन्स्टिट्यूशन ऑफ प्लॅस्टिक्स
इंजिनिअरिंग ऍण्ड टेक्नॉलॉजी, म्हैसूर
*शिक्षण - टूल ऍण्ड डाय मेकिंग*
कालावधी - चार वर्षे
पात्रता - दहावी आणि बारावी पास
संधी - टूल ऍण्ड डाय इंडस्ट्री, भारत आणि मलेशियाशियामध्ये भरपूर संधी गव्हर्नमेंट टूल रूम ऍण्ड ट्रेनिंग सेंटर
(जीटीटीसी), नेट्टूर टेक्नॉलॉजी ट्रेनिंग
फाउंडेशन (एनटीटीएफ)
सेक्रेटरीअल प्रॅक्टिस
कालावधी - एक वर्ष
फॅशन टेक्नॉलॉजी
कालावधी - एक वर्ष
मॉडर्न ऑफिस प्रॅक्टिस
कालावधी - तीन वर्षे
------------------------------
*हॉस्पिटॅलिटी ऍण्ड टुरिझम*
----------------------------- -
*टूरिस्ट गाइड*
कालावधी - सहा महिने
डिप्लोमा इन फूड ऍण्ड बेव्हरेज सर्व्हिस
कालावधी - दीड वर्ष
बेसिक कोर्स ऑन ट्रॅव्हल फेअर ऍण्ड टिकेटिंग
कालावधी - तीन महिने
बेसिक कोर्स इन कॉम्प्युटराइज्ड रिझर्व्हेशन
सिस्टम (एअर टिकेटिंग)
कालावधी - एक महिना
अप्रेन्टाईसशिप
कालावधी - पाच महिने ते चार वर्षे
*शिक्षण - व्होकेशनल स्ट्रिममध्ये बारावी*
डिजिटल फोटोग्राफी
कालावधी - एक वर्ष
स्टोअर कीपिंग ऍण्ड पर्चेसिंग
कालावधी - एक ते तीन वर्षे
सेल्स ऍण्ड अकाउंटन्सी
कालावधी - एक ते तीन वर्षे.
------------------------------
*बांधकाम व्यवसाय*
----------------------------- -
*शिक्षण - बीआर्च*
कालावधी - पाच वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र,NATA , JEE
संधी कोठे? - स्वतःचा व्यवसाय किंवा बांधकाम उद्योगांमध्ये नोकरी, नागरी सेवा परीक्षा
पुढील उच्च शिक्षण - एमआर्च, एमटेक
*पारंपरिक कोर्सेस*
----------------------------- -
*शिक्षण - बीएससी*
कालावधी - तीन वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र, प्रवेश थेट
संधी कोठे? - आयटी, औद्योगिक क्षेत्र, संशोधन संस्था, नागरी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार
पुढील उच्च शिक्षण - एमएससी, एमबीए, एमसीए, एमपीएम इत्यादी.
------------------------------
*शिक्षण - बीएससी(Agri)*
कालावधी - 4 वर्षे
पात्रता व प्रवेश - बारावी शास्त्र व CET
संधी कोठे? - कृषी उद्योग कारखान्यात नोकरी, सरकारी कृषी सेवा नोकरी, नागरी सेवा परीक्षा, शेती व्यवसाय
पुढील उच्च शिक्षण - एमएससी (ऍग्रो), राष्ट्रीय कृषी परिषद संस्थांमध्ये संशोधन
------------------------------
*शिक्षण - बीए*
कालावधी - तीन वर्षे
संधी कोठे? - नोकरीसाठी व्यावसायिक, मृदू कौशल्ये, प्रमाणपत्र अथवा पदविका अभ्यासक्रम बीए करतेवेळी जास्त फायदेशीर. नागरी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार
पुढील शिक्षण - एमए, एमबीए, पत्रकारिता, पदविका, एलएलबी
-----------------------------
*शिक्षण - बीकॉम*
कालावधी - तीन वर्षे
संधी कोठे? - आयसीडब्ल्यूए, सीए, सीएस परीक्षांचा अभ्यास बीकॉम करताना देणे फायदेशीर, नागरी सेवा परीक्षा, स्वयंरोजगार, लेखापाल म्हणून नोकरी
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीएसएल*
कालावधी - पाच वर्षे
संधी कोठे? - विधी व्यवसाय, विधी सल्लागार, नागरी सेवा परीक्षा, न्याय सेवा
पुढील उच्च शिक्षण - एलएलएम
------------------------------
*शिक्षण - डीएड*
कालावधी - दोन वर्षे
प्रवेश - सीईटी आवश्यक
संधी कोठे? - प्राथमिक शिक्षण शिक्षक
पुढील उच्च शिक्षण - बीए, बीकॉम व नंतर बीएड
------------------------------ ----------------------
*शिक्षण - बीबीए,* बीसीए,बीबीएम
कालावधी - तीन वर्षे
प्रवेश - सीईटी
संधी कोठे? - औद्योगिक क्षेत्रात नोकरी, आयटी क्षेत्रात नोकरी, स्वयंरोजगार, नागरी सेवा परीक्षा
पुढील उच्च शिक्षण - एमबीए, एमपीएम, एमसीए
------------------------------
*फॉरेन लॅंग्वेज*
(जर्मन, फ्रेंच, रशियन, स्पॅनिश, चायनीज,
जॅपनीज, कोरियन)
कालावधी ः बेसिक, सर्टिफिकेट किंवा इतर
कोर्सेसवर आधारित
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*फॉर्म भरताना हे लक्षात ठेवा.......*
------------------------------
अर्ज भरायला जाताना मार्कलिस्ट, जातीचा दाखला, नागरिकत्व, आधार कार्ड आणि घराच्या पत्त्याच्या पुराव्याची अटेस्टेड कॉपी न्यायला विसरू नका.
पासपोर्ट आकाराचा फोटो, डिंक, त्याचबरोबर कागदपत्रे जोडण्यासाठी स्टेपलर जवळ ठेवा.
विद्यार्थ्यांचे नाव, पत्ता, ई-मेल, नागरिकत्व, जन्मतारीख, जन्मस्थळ इत्यादीची माहिती अर्जात दिलेल्या पद्धतीनेच भरावी. उदा.- आडनाव, पालकांचे नाव, स्वतःचे नाव योग्य रकान्यातच लिहावे. इंग्रजीमध्ये अर्ज भरल्यास तो कॅपिटल लेटरमध्ये भरावा.
अर्ज चुकू नये म्हणून सुरवातीला त्याच्या झेरॉक्सवर माहिती भरा. त्यानंतर अर्जात ती माहिती भरा. एखादा मुद्दा न कळल्यास मार्गदर्शन घ्या.
अर्ज भरायच्या तारखा आणि वेळापत्रकाचे कसोशीने पालन करा.
इतर क्षेत्रांमध्ये मिळवलेल्या प्रमाणपत्रांच्या अटेस्टेड कॉपी बरोबर ठेवा.
काही महाविद्यालयांमध्ये प्रश्नावली भरावी लागते. त्यामध्ये तुम्हाला याच महाविद्यालयामध्ये प्रवेश का हवा, ठराविकच शाखा का, रोल मॉडेल कोण, करिक्युलर ऍक्टिव्हिटीजबाबत अनेक प्रश्न असतात. अशा प्रश्नांवरील उत्तरांचा आधीच विचार करून ठेवा.
बऱ्याच वेळेला ऑनलाइन अर्जप्रक्रिया पूर्ण करायच्या असतात. त्यासाठी संबंधित कागदपत्रे स्कॅन करा. ते पेनड्राइव्हवर सेव्ह करून ठेवा आणि तो आपल्या जवळ बाळगा.
-----------------------------
*काही महत्त्वाची संकेतस्थळे*
1) तंत्रशिक्षण संचालनालय, महाराष्ट्र शासन.
(अभियांत्रिकी, वास्तुशास्त्र, औषधनिर्माण शास्त्र, हॉटेल मॅनेजमेंट आदी)
2) वैद्यकीय शिक्षण आणि संशोधन संचालनालय, महाराष्ट्र शासन (वैद्यकीय शिक्षणासंबंधी)
3) व्यवसाय शिक्षण व प्रशिक्षण संचालनालय, महाराष्ट्र शासन (औद्योगिक प्रशिक्षणासाठी)
4) पारंपरिक पदवी शिक्षण, पुणे विद्यापीठ
5) भारतीय प्रौद्योगिक संस्था (आयआयटी), मुंबई
आयआयटी, जेईईसंबंधी (बी. टेक पदवी)
6) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षण मंडळ (सीबीएसई) "एआयईईई‘संबंधी अभियांत्रिकी शिक्षण
7) एनडीए प्रवेश परीक्षेणसंबंधी केंद्रीय लोकसेवा आयोगय (यूपीएससी)
8) फाँरेन्सिक सायन्स अँड सायबर सेक्युरिटी www.pcfscs.in
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मुलांना आज काय शिकविण्याची गरज आहे
👍रात्री लवकरच झोपणे व सकाळी लवकरच उठणे.
👍किमान 5/10 मिनिटं एका जागेवर शांत बसणे , एकाग्रता वाढविणे .
👍सलग एक ते दोन तास एका जागेवर बसून वाचन , लेखन , अभ्यास करण्याची सवय लावणे .
👍चांगल्या व आवश्यक सूचना ऐकूण घेवून त्यांवर विचार करण्याची सवय लावणे .
👍घरातील लहान मोठ्या व्यक्तींशी चर्चा , संवाद साधने , विचारविनिमय करणे .
👍आपली मते घरांतील व्यक्ती , शिक्षक , सहकारी मित्र यांचे बरोबर व्यक्त करणे .
👍चांगले काय आणि वाईट काय याचा सारासार विचार करुन योग्य निर्णय घेण्याची क्षमता वाढविणे .
👍खरे काय , खोटे काय याची वास्तवाशी सांगड घालून पडताळा घेणे व सत्याच्या मार्गानेच जाणे .
👍व्यवहारिक द्रुष्ट्या योग्य काय व अयोग्य काय याची समज येणे .
👍अंधश्रद्धा न मानता विज्ञानाच्या आधारावर , प्रत्यक्ष पडताळा घ्यायचा प्रयत्न करणे .
👍मोबाईल , T V , सोशियल मेडिया याचा कामापूरता व मर्यादित वापर करणे .
👍घरातील व घराबाहेरील कामे मनापासून करण्याची सवय लावणे .
👍शिक्षण हे फक्त नोकरी मिळण्यासाठी व पैसे कमविण्यासाठी नसून माणुस म्हणून जगण्यास लायक बनविण्यासाठी आहे हे रुजवीणे .
👍नोकरी नाही मिळाल्यास कोणताही व्यवसाय करण्याची क्षमता प्राप्त करणे .
👍आपल्या कुटुम्बातील , समाजातील लहान मोठ्या व्यक्तींचा आदर राखण्यास शिकविण्यासाठी शिक्षण असावे .
👍जिवनात नेहमीच आशादायी व सकारात्मक द्रुष्टीकोण निर्माण करायला शीकवीणे .
👍आपली क्षमता पाहून स्पर्धा करणे आवश्यक , अनावश्यक स्पर्धा टाळणे शिकणे आवश्यक .
👍दुसरे करतात म्हणून आपणही तेच न करता वेगळे करण्याचा प्रयत्न करायला शीकवीणे .
👍विनाकारण दुसऱ्यांना कमी लेखने व टीकाटिप्पणी करणे टाळावे .
👍प्रत्येकामध्ये काही ना काही चांगले गुण असतात ते घेण्याचा प्रयत्न करायाला शीकवीणे .
👍परीक्षेत किती गुण मिळाले हे महत्वाचे नसून त्यांचेमध्ये किती नितिमुल्ये रुजली हे महत्वाचे आहे .
👍अब्राहम लिंकनने हेडमास्तर यांना लिहिलेले पत्र किमान आठवड्यातून एकदा वाचून दाखवून त्याचा अर्थ स्पष्ट करुन सांगणे .
👍साने गुरुजी यांचे शामची आई या व अशा कथा वाचुन त्याचा अर्थ समजून घेण्यास शीकवीणे .
👍स्वकष्टाने कमविलेल्या एका छदामची किंमत वाम मार्गाने कमवीलेल्यl घबाडापेक्षा किती तरी पटीने जास्त असते हे शिकणे आवश्यक आहे .
👍चांगले इंग्रजी शिकला म्हणजे हुशार झाला असे नसून मातृभाषेतून संस्कार व व्यवहार शिकला म्हणजे हुशार झाला .
आजकाल या व अशाच शिक्षणाबाबत पाठपुरावा करणे आवश्यक आहे तर आणि तरच तो विद्यार्थी सर्वगुणसंपन्न होईल आणि जिवन जगण्यास लायक होईल असे वाटते .
पालक वर्गाने यांवर जरूर विचार करावा असे वाटते.
धन्यवाद
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करियर गुरू, ह्या लेख मालेत आज,
स्पर्धा परीक्षांची तयारी, ...
सर्व प्रकारच्या स्पर्धा परीक्षा तयारी बाबत मार्गदर्शन, ...
साभार, डॉ. बबन जोगदंड,
वाचा संस्कारदीपवर, ...
विविध अभ्यासक्रमांचे प्रवेश आणि वेगवेगळ्या शासकीय सेवांच्या निवडीसाठी चाळणी परीक्षा घेतली जाते. या परीक्षा देणाऱ्या विद्यार्थ्यांची संख्या मोठ्या प्रमाणात वाढली आहे. त्यामुळे या परीक्षांची काठिण्य पातळी अधिक वाढवण्यात आली आहे. या स्पर्धा परीक्षांची तयारी दहावी, बारावीपासून केली तर लवकर यश मिळवणे शक्य होते.
स्पर्धा परीक्षेत यश मिळवण्यासाठी अनेकांना चार ते पाच वेळा प्रयत्न करावे लागतात. पहिल्या किंवा दुसऱ्या प्रयत्नात यश मिळवणाऱ्या विद्यार्थ्यांची संख्या नगण्य आहे. बरेच विद्यार्थी बारावीनंतर चार-पाच वर्षांचे अभ्यासक्रम पूर्ण करून स्पर्धा परीक्षांकडे वळतात. त्यामुळे त्यांची तयारी उशिरा सुरू होते व पुढे परत चार-पाच वर्षे अभ्यासात गेल्याने ते लवकर यश संपादन करू शकत नाहीत. बी.ए.बी.कॉम, बी.एस्सी. यासारख्या अभ्यासक्रमांना प्रवेश घेणाऱ्या विद्यार्थ्यांनी समजा दहावी, बारावीपासून स्पर्धा परीक्षेच्या अभ्यासक्रमास सुरुवात केली तर पदवी होईपर्यंत विद्यार्थ्यांचा जवळपास 50 टक्के स्पर्धा परीक्षेचा अभ्यास पूर्ण झालेला असेल व असे विद्यार्थी पहिल्या किंवा दुसऱ्या प्रयत्नात उत्तीर्ण होतात. जे विद्यार्थी कमी वयात अधिकारी होतील ते सहजपणे सर्वोच्च पदापर्यंत पोहोचू शकतात.
मनात किंतू नको, ...
अनेक विद्यार्थ्यांना असा प्रश्न पडतो की, आपले पदवीचे शिक्षण पूर्ण झाल्यावर आपण स्पर्धा परीक्षेची तयारी सुरू ठेवली आणि त्यात जर अपयश आले तर आपल्या भविष्याचे काय? आपणास पुढे नोकरी मिळेल का? आपण पदवी अभ्यासक्रमापासून बरेच दिवस दूर असल्याने आपल्या शिक्षणाचा नोकरीमध्ये कितपत फायदा होऊ शकेल. असे अनेक प्रश्न त्यांना सतावत असतात. पण जो विद्यार्थी सातत्याने कष्ट घेतो तो निश्चित कोणत्या तरी परीक्षेत यश मिळवतो. अनेक जण पदवी शिक्षणानंतर खासगी नोकरी पत्करतात. त्यानंतर दोन-तीन वर्षांनंतर स्पर्धा परीक्षेकडे वळतात. त्यामुळे त्यांची द्विधा मन:स्थिती होते परिणामी त्यांना मनाजोगते यश मिळत नाही. काही विद्यार्थ्यांना खासगी नोकरी केल्यानंतर आपल्या सर्वांगीण व्यक्तिमत्त्वात बदल होतो असे वाटते. ते अगदी खरे आहे. नोकरीच्या अनुभवातून आपले आचारविचार समृद्ध होतात. वाचन, लेखन, बैठका, नियोजन यामुळे आपल्या ज्ञानामध्ये भर पडते. याचा मुलाखतीसाठी उपयोग होऊ शकतो. परंतु नोकरीमध्ये गेलेला वेळ भरून निघत नाही. परिणामी आपली उशिराने निवड होऊ शकते.
10 वी-12 वीनंतर शाखा निवडताना...
बऱ्याचदा आपल्या पाल्यांना पुढे स्पर्धा परीक्षेसाठी पाठवायचे असल्याने दहावीनंतर कलाशाखा की विज्ञान शाखा निवडावे असा प्रश्न पडतो. खरे तर विद्यार्थ्यांनी दहावीनंतर विज्ञान शाखेकडे वळावे. यामुळे इंग्रजी सुधारते, त्याचप्रमाणे अधिक अभ्यास करण्याची सवय लागते. बारावीनंतर मात्र ज्यांना भविष्यात स्पर्धा परीक्षा देऊनच करिअर करायचे आहे त्यांनी वैद्यकीय किंवा अभियांत्रिकी शाखेत शक्यतो वेळ खर्ची घालवू नये. त्यांनी बी.ए., बी.कॉम किंवा बी.एस्सीला प्रवेश घ्यावा. जर आपण दहावी, बारावीपासून स्पर्धा परीक्षेची तयारी सुरू केली तर निश्चितपणे कोणती ना कोणती वर्ग-1 अथवा वर्ग-2 पदाची नोकरी हमखास मिळू शकते.
नेमकी तयारी कशी करावी, ...
दहावी, बारावीपासून स्पर्धा परीक्षेची नेमकी तयारी कशी करावी असा प्रश्न विद्यार्थी व त्यांच्या पालकांना नेहमीच पडतो. जे विद्यार्थी दहावी, बारावीला आहेत. त्यांनी उन्हाळ्याच्या सुटीत जर एम.पी.एस.सी. किंवा यु.पी.एस.सी.साठी घेण्यात येणाऱ्या फाऊंडेशन कोर्सला प्रवेश घेतला तर त्यांना योग्य दिशा मिळू शकेल. यानंतर विद्यार्थ्यांनी स्पर्धा परीक्षेत जे उमेदवार यशस्वी झाले आहेत. त्यांच्याशी संपर्क करून त्यांच्याकडून मार्गदर्शन घेणे गरजेचे आहे. त्याचबरोबर यशस्वी उमेदवारांची मार्गदर्शनपर व्याख्याने ऐकावीत. त्यांची विविध मासिके, वर्तमानपत्रे, अनियतकालिके यामधून प्रकाशित झालेल्या मुलाखती वाचाव्यात. यु.पी.एस.सी. परीक्षेसाठी ही परीक्षा नेमकी काय असते, यावर ‘आयएएस प्लॅनर’ व एमपीएससीसाठी ‘एमपीएससी प्लॅनर’ ही दोन पुस्तके बाजारात उपलब्ध आहेत. ती वाचून काढावी. यामुळे या परीक्षासंदर्भातील आपल्या सर्व शंका दूर होतील.
स्पर्धा परीक्षेमध्ये सामान्य अध्ययन (जनरल नॉलेज) या विषयावर अधिकाधिक प्रश्न पूर्वपरीक्षेपासून मुख्य परीक्षा व मुलाखतीपर्यंत विचारले जातात. त्यामुळे सामान्य अध्ययन या घटकासाठी पाचवी ते बारावीपर्यंतची सर्व पुस्तके काळजीपूर्वक वाचली पाहिजेत. विद्यार्थ्यांनी वर्तमानपत्रांचे बारकाईने वाचन केले पाहिजे. विशेषत: इंग्रजी वर्तमानपत्रे वाचण्याचा सराव केला पाहिजे. वर्तमानपत्रातील क्रीडा घडामोडींशी संबंधित पान वाचून त्याच्या नोंदी कराव्यात. लोकराज्य, योजना, यशदा-यशमंथन, कुरुक्षेत्र ही मासिके नित्यनियमाने वाचायला हवीत. वर्तमानपत्रे ही सामान्य अध्ययनासाठी त्याचबरोबर निबंधासाठी व मुख्य परीक्षेच्या वैकल्पिक विषयांसाठी फार महत्त्वाची भूमिका बजावतात. साधारणत: वर्तमानपत्राचा या परीक्षांसाठी 20 ते 25 टक्के वाटा आहे म्हणून लहानपणापासून मुलांना वर्तमानपत्रे वाचण्याबाबत प्रवृत्त केले पाहिजे. दूरचित्रवाहिन्या व आकाशवाणीवरील मराठी व इंग्रजी बातम्याही दररोज ऐकायला हव्यात.
कौशल्य विकसित करावे, ...
इंटरनेटच्या माध्यमातून आपणास हवी ती माहिती व मार्गदर्शन उपलब्ध होऊ शकते. स्पर्धा परिक्षेच्या संदर्भात अनेक संकेतस्थळे व यू ट्यूबद्वारे खूप माहिती उपलब्ध आहे. वक्तृत्व व लेखन शैली सुधारावी. कुठल्याही परीक्षेसाठी लेखनशैली उत्तम असायला हवी. स्पर्धा परीक्षेसाठी काही पेपर्स हे वर्णनात्मक असतात. त्यामुळे विद्यार्थ्यांचे हस्ताक्षर सूंदर असायला हवे. ते विकसित करता येऊ शकते. लेखन, मनन, वाचन, चिंतन आणि मेहनत या पंचसूत्रीतून प्रभावी लेखन कौशल्य सुधारता येते. विद्यार्थ्यांनी दहावी, बारावीपासून मुलाखतीच्या अनुषंगाने तयारी करायला हवी. त्यासाठी त्यांनी आपले संवाद कौशल्य सुधारले पाहिजे.लिखाणाची चांगली शैली विकसित करायला हवी. लेखनाचा उपयोग निबंध या विषयाच्या पेपरसाठी प्रामुख्याने होतो. कारण निबंध लेखन हे आपल्याला अधिक गुण मिळवून देण्यास मदत करते. लेखनाची तयारी करताना अनेक पुस्तकांचे, साहित्यांचे वाचन आवश्यक आहे. सरावाने आपले लेखन कौशल्य बालपणापासून विकसित करता येऊ शकते.
लेखक: डॉ. बबन जोगदंड
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विद्यार्थ्यांनी शालेय जीवनातच आपलं ध्येय निश्चित करावं ..✍️अमोल भोजने
" मी शालेय जीवनातच ठरवलं होतं स्पर्धा परीक्षांची तयारी करायची, ग्रामीण भागात एखाद मोठं अधिकारी IAS, IPS अधिकारी आलं की मनात एकच इच्छा निर्माण व्हायची आपण पण असेच मोठं अधिकारी बनून देश सेवा करावी , तिथूनच आपली वाटचाल सुरू झाली, मी मुंबई सारख्या शहरात आल्यावर 10 बाय 10 च्या रूम मध्ये राहून जॉब करून , स्वतःच क्लासेस चालविणे , कॉलेज अभ्यास , तसेच स्पर्धा परीक्षा तयारी , सोशीयल वर्क करणे हे सर्व करणे थोडं अवघडच होत, पण मनात ध्येय निश्चितच होता, अनेकांनी सल्ला दिला तुला हे जमणार नाही , MPSC सारख्या परीक्षा खूप अवघड असतात, म्हणे, पण कुणाच्या बोलण्या वरून आपला प्रवास थांबला नाही, मी कॉलेजमध्ये असताना पदवीच्या प्रथम वर्षा पासून MPSC, UPSC , SSC, या परीक्षेला सुरवात केली ,
या सर्व परीक्षा बाबत आधी माहिती गोळा केली , त्या परीक्षे बाबत अभ्यास संदर्भग्रँथ , नोट्स, पुस्तके इतर साहित्य ,
मला सामाजिक क्षेत्रात काम करण्याची खूप आवड होती अनेक पदे भेटली पण कधी पदासाठी काम केलं नाही, सामाजिक स्वराज्य कोकण संघटनेकडून शिक्षण विभाग रायगड जिल्हा उपाध्यक्ष पद दिल , विदर्भ , मराठवाडा , किंवा पश्चिम महाराष्ट्र हजारो विद्यार्थी सम्पर्क मध्ये होते कोण पोलीस, रेल्वे विभाग , इतर अधिकारी विद्यार्थी , पण कोकण विभाग त्या मानाने खूप कमी होता स्पर्धा परीक्षेत , एकच चिंता होती कोकणातील तरुण ,तरुणींना एकत्र आणण्याची कोकणात चांगल्या दर्जाचे अधिकारी बनाव हीच इच्छा मनात कायम सलत होती , म्हणून मी 2015 मध्ये व्हॉटअप ग्रुप ओपन ध्येय स्पर्धा परीक्षा , आणि MPSC katta , ग्रुपच्या माध्यमातून तरुणांना चांगल्या दर्जाची आवश्यक माहिती मिळत गेली, मी स्वतः 2012 , PSI, ( MPSC ) 2013 UPSC ,IAS, IPS , 2015 ,UPSC, SSC / CBI ,रेल्वे सारख्या परीक्षा दिल्या , यश नाही मिळालं तरी काही गोष्टीच अनुभव मिळून जात, मी स्वतः अनेक अधिकाऱ्यांचं करिअर मार्गदर्शन शिबीर ऐकायला जायचो , मी स्टेजच्या खाली खुर्चीवर बसलेला असायचो अधिकारी वर्ग स्टेज वर आपण पण एक दिवस करिअर मार्गदर्शन करू , हे ध्येय मनात पक्क होत , 2017 रोजी तळा येथे डॉ, राजेश शिगवण सर यांच्या अध्यक्षतेखाली तळा कुणबी युवा यांनी करिअर मार्गदर्शन ठेवल त्यात मला प्रमुख मार्गदर्शन म्हणून संधी मिळाली त्या नंतर मुंबई, इतर ठिकाणी करिअर मार्गदर्शन करण्याची संधी मिळाली, याची सुरवात माझ्या गावापासून केली, हजारों विद्यार्थ्यांना मार्गदर्शन केलं प्रवास अजूनही तसाच सुरू आहे, हे सर्व अग्निदिव्य पाड पाडत असताना मला सुरवातीला खूप अपयश आले , अनेक संकटे आली पण खूप खस्ता खाव्या लागल्या पण कधी डगमगलो नाही , ना ध्येय सोडल , या संकटातुन मी मार्ग काढत चाललो, मित्रानो , विद्यार्थ्यांनो जीवनात कितीही संकटे आली तरी धीर आणि आपलं ध्येय अर्ध्यावर सोडू नका , अपयशाला घाबरून आत्महत्या करू नका , असे किती तरी विद्यार्थी आहेत 12 ,13 परीक्षा देऊन
नापास होऊन पण IAS ,IPS इतर अधिकारी झालेत, आपण काय करतो आपलं यश जवळ असतो त्याच वेळी आपण प्रयत्न सोडून देतो...
म्हणून तरुणांनी शेवट पर्यंत करा जीवनात हाताला न लागणाऱ्या स्वप्नांच्या मागे एकदा तरी धावून बघा
भले अधिकारी नाही झालात तरी आयुष्यात अनुभव मिळून जाईल पण प्रयत्न हे अधिकारी बनण्यासाठीच करा...MPSC, UPSC ,PSI, या सारख्या परिक्षाची माहिती घ्या , योग्य मार्गदर्शकांकडून सल्ला घ्या, दरवर्षी राज्य ,व केंद्र सरकारच्या जाहिराती निघतात , योग्य माहिती घेऊन फॉर्म भरा, आपलं ध्येय गाठण्यासाठी प्रयत्न करा....!
अमोल पांडुरंग भोजने
( स्पर्धा परीक्षा - UPSC, MPSC ,PSI )
7498489891
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करियर गुरू, ह्या लेख मालेत आज,
(कोविडोत्तर संधी) : ‘कचऱ्या’तून करिअर, ...
साभार, डॉ. गिरीश वालावलकर,
वाचा संस्कारदीप वर, ...
रुग्णालये, दवाखाने किंवा अन्य आरोग्य संस्थांमधून बाहेर टाकल्या जाणाऱ्या कचऱ्याला ‘बायोमेडिकल वेस्ट’ म्हणजे जैव वैद्यकीय कचरा असं संबोधलं जातं. जैव वैद्यकीय कचऱ्यामध्ये संसर्गजन्य आजार पसरवणारे विषाणू असू शकतात. त्यामुळेच हा कचरा प्रदूषण निर्माण करणाऱ्या सर्वात घातक घटकांपैकी एक घटक मानला जातो. या कचऱ्यामध्ये जखमा बांधण्यासाठी वापरली गेलेली बँडेजेस्, रक्त किंवा शरीरातील अन्य द्रवपदार्थ यांच्या बरोबरच इंजेक्शन देण्यासाठी वापरल्या जाणाऱ्या प्लास्टिकच्या सििरजेस् आणि तत्सम उपकरणे, विविध प्रकारच्या औषधांमध्ये असलेली अनेक प्रकारची रसायने, रोगनिदानासाठी वापरले जाणारे किरणोत्सारी घटक यांचा समावेश असतो. त्यामुळे त्याची विल्हेवाट लावणं हे जिकिरीचं पण अत्यावश्यक काम असतं. हा कचरा योग्य पद्धतीने नष्ट करून त्यापासून पर्यावरणाला असलेला धोका टाळणं याला ‘जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापन’ म्हटलं जातं. हा सध्या भरभराटीला येत असलेला व्यवसाय असून त्यामध्ये करिअरसाठी अनेक संधी आहेत.
सध्या भारतामध्ये जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापनाशी संबंधित उद्योगांतील सेवा आणि उत्पादनांची वर्षांला साधारणपणे २५० कोटी रुपयांची विक्री होते. येत्या काही वर्षांत ती आणखी वाढत जाऊन २०२४ साली जवळपास ३०० कोटी रुपयांपर्यंत पोहोचेल असा अंदाज आहे. करोना महासाथीनंतर जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापनाला चालना देण्यासाठी सरकारनेसुद्धा विशेष प्रयत्न सुरू केले आहेत. त्यामुळे या क्षेत्रात करिअर करण्यासाठी अधिकाधिक वाव मिळणार आहे.
या क्षेत्रात प्रवेश करण्यासाठी रसायनशास्त्र, जीवशास्त्र, सूक्ष्मजीवशास्त्र आणि जीवरसायनशास्त्र किंवा पर्यावरणशास्त्रातील पदवी उपयुक्त ठरते. त्यापुढे पर्यावरणशास्त्रातील पदव्युत्तर शिक्षण या क्षेत्रात यशस्वी होण्यासाठी उपयुक्त ठरतं. मुंबईतील ‘टाटा इन्स्टिटय़ूट ऑफ सोशल सायन्सेस’ सारख्या प्रतिष्ठित संस्थेत जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापनासंदर्भात विशेष शैक्षणिक अभ्यासक्रम उपलब्ध आहेत. या संस्थेतून शिक्षण घेणं पुढील वाटचालीसाठी लाभदायक ठरतं. औपचारिक शिक्षणाबरोबरच पर्यावरण संतुलनाविषयी जागरूकता आणि सामाजिक स्वास्थ्याबद्दल आस्था असेल तर या क्षेत्रात काम करणं आनंददायक होतं.
कचऱ्याची हाताळणी आणि विविध घटकांचं आवश्यकतेनुसार विलगीकरण, त्यावर प्रक्रिया करण्याच्या ठिकाणापर्यंत त्यांची वाहतूक, साठवण, त्या कचऱ्यातील घातक घटक नष्ट करण्याची प्रक्रिया आणि त्या प्रकियेतून निर्माण झालेल्या निरुपद्रवी पदार्थाची योग्य ती विल्हेवाट या सर्वाचा समावेश यात होतो.
बहुसंख्य रुग्णालयांकडे स्वत:ची जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापन सुविधा नसते. त्यामुळे बायोमेडिकल वेस्ट व्यवस्थापनाची जबाबदारी पर्यावरण क्षेत्रातील व्यावसायिक कंपनीकडे सोपवली जाते. बहुतेक वेळा एखादी पर्यावरण कंपनी ही सर्व कामे कंत्राटी पद्धतीने करते. या सर्व कामांसाठी त्या शहराच्या नगरपालिका, महानगरपालिका किंवा तत्सम संस्था त्या कंपनीला संपूर्ण सहकार्य करतात. ‘मेडिकेअर एन्व्हायर्नमेंट मॅनेजमेंट प्रायव्हेट लिमिटेड’, ‘सिनर्जी वेस्ट मॅनेजमेंट प्रायव्हेट लिमिटेड’, ‘बायोटिक वेस्ट सोल्युशन्स प्रायव्हेट लिमिटेड’ यांसारख्या कंपन्या जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापनामध्ये देशपातळीवर अग्रेसर आहेत. त्याखेरीज अनेक वेळा एखादी स्थानिक कंपनी शहराच्या सरकारी यंत्रणेकडून योग्य ते परवाने तसेच परवानग्या घेऊन त्या शहराच्या जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापनाची जबाबदारी घेते. कंपनीला काही रुग्णालयं तसंच नगरपालिका किंवा तत्सम सरकारी संस्थांकडून या कामाचा मोबदला दिला जातो. जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापन करणाऱ्या पर्यावरण कंपन्यांना अलिकडच्या काळात तंत्रज्ञ, व्यवस्थापक आणि अगदी महाव्यवस्थापकांपर्यंतच्या पदांसाठी तरुणांची वाढती गरज भासू लागली आहे. त्यामुळे या क्षेत्रात नोकरीच्या संधी वाढत्या प्रमाणात उपलब्ध होत आहेत. नोकरीबरोबरच स्वत:ची कंपनी सुरू करून स्वत:च आपल्या शहराच्या जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापनाचं कंत्राट घेणं शक्य असतं. अनेक महत्त्वाकांक्षी तरुणांनी आपल्या शहरांमध्ये अशा कंपन्या सुरू केल्या आहेत आणि त्या उत्तम फायदा मिळवत आहेत.
जैव वैद्यकीय कचरा व्यवस्थापनातील सर्वात महत्त्वाचा भाग म्हणजे त्या कचऱ्यावर केली जाणारी प्रक्रिया. यातील घातक घटकांचं विघटन करून त्यांचं निरुपद्रवी पदार्थामध्ये रूपांतर करणं अतिशय कौशल्याचं काम आहे. आज जैव वैद्यकीय कचऱ्यावर तो जाळण्यासारख्या अगदी प्राथमिक स्वरूपाच्या प्रक्रियेपासून ते त्यांचं रासायनिक किंवा जैविक विघटन करण्यापर्यंतच्या आधुनिक प्रक्रियेपर्यंत सर्व प्रकारच्या प्रक्रिया केल्या जातात. तरीही अजूनही योग्य ते संशोधन करून या प्रक्रियांमध्ये सुधारणा घडवायला प्रचंड वाव आहे. विशेष म्हणजे, त्यासाठी कोणत्याही मूलभूत संशोधनाची गरज नाही तर प्रक्रियेचा वेळ कमी करणं किंवा त्यासाठी लागणाऱ्या विजेच्या वापरावर मर्यादा ठेवणं यांसारख्या सुधारणा झाल्या तरीही त्यामुळे खूप आर्थिक फायदा मिळू शकेल. म्हणूनच अशा प्रकारचं काम करू इच्छिणाऱ्या धडपडय़ा तरुणांना या क्षेत्रात अतिशय यशस्वी करिअर घडवण्याची संधी आहे. विषाणूंमुळे किती भयानक रोग पसरू शकतात आणि त्यामुळे आपल्या केवळ आरोग्यावरच नव्हे तर आर्थिक आणि सामाजिक जीवनावरसुद्धा किती गंभीर परिणाम होऊ शकतात हे करोनाच्या महासाथीने पुन्हा एकदा अधोरेखित केलं आहे. रोग पसरवू शकणाऱ्या जिवाणू-विषाणूंचा समावेश असलेला जैव वैद्यकीय कचरा आपल्यासाठी किती घातक आहे हे आपल्याला पुन्हा एकदा जाणवलं आहे. त्याचं योग्य ते व्यवस्थापन करण्याची गरज संपूर्ण जगाच्याच लक्षात आली आहे. त्यामुळे येत्या काही वर्षांत जैव वैद्यकीय कचऱ्याच्या व्यवस्थापनाचा उद्योग वेगाने वाढत जाणार आहे, त्याचबरोबर त्यामध्ये उत्तम करिअर करण्याच्या संधीसुद्धा सातत्याने वाढत जाणार आहेत.
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"आमचं लेकरू हुशार आहे पण जरा अभ्यासात कमी आहे", अशा वाक्याला बरेच जण अजुनही हसतात.
शाळेच्या अभ्यासात कमी आहे किंवा परीक्षेत फार मार्क्स मिळत नाहीत, तर ती व्यक्ती 'बुद्धीमान' नाही हा आपल्याकडे एक खूप मोठा गैरसमज आहे.
खरंतर गार्डनर (Howard Gardner) या मानसशास्त्रज्ञाने ही समजूत कशी ठार चूकीची आहे हे सांगितलंय. त्याने बुद्धीमत्तेचे मुख्य आठ प्रकार पाडले. कुठल्याही व्यक्तीमध्ये या आठ प्रकारांपैकी एक किंवा अधिक बुद्धिमत्तांचं कमी-अधिक प्रमाण असतं, असं त्याचं त्याचं मत होतं.
1. Visual - Spatial Intelligence :
या प्रकारामध्ये अचूक नकाशा बघणे, random भटकत असतानाही दिशांचा योग्य अंदाज येणे, फोटो-ग्राफ्स-तक्ते मधून अर्थ काढणे, कोडी सोडवणे, चित्र, patterns मध्ये गती असणं हे सगळं येतं. आर्किटेक्ट, इंजिनीयर, चित्रकार वगैरे यात येतात.
2. Linguistic - Verbal Intelligence :
या प्रकारात भाषेवर प्रभुत्व, शब्दांवर पकड, भारी बोलता येणं किंवा मध्ये मध्ये शाब्दिक विनोद/कोट्या करता येणं हे सगळं येतं. यात शिक्षक, वकील, पत्रकार, काही राजकारणी वगैरे येतात.
3. Logical - Mathematical Intelligence :
आपल्या शाळेत ज्या लोकांना "हुशार" समजतात, अशी मंडळी या प्रकारात येतात. गणित सोडवणं, abstract गोष्टींची लॉजिकल उत्तरं देणं हे सगळं येतं. वैज्ञानिक, गणितज्ज्ञ, इंजिनीयर, कॉम्प्युटर प्रोग्रामर वगैरे लोक यात येतात.
4. Bodily - Kinesthetic Intelligence :
शरीराची वेगवान हालचाल करणं, शरीरावर प्रचंड कंट्रोल असणं, मेंदू आणि डोळ्यांत/इतर अवयवांत भन्नाट co-ordination असणं, हे सगळं या प्रकारात येतं. खेळाडू, डान्सर, शिल्पकार वगैरे लोक यात येतात.
5. Musical Intelligence :
चाल, धून, ताल वगैरे लक्षात राहणं, वाद्यांबद्दल आवड असणं, लवकर नवीन गाणी किंवा विविध वाद्यं शिकता येणं या सगळ्या गोष्टी म्हणजे सांगीतिक बुद्धीमत्ता होय.
गायक, संगीतकार, कंपोझर वगैरे मंडळी यात येतात.
6. Interpersonal Intelligence :
लोकांशी संवाद साधता येणं, लोकांच्या भावना समजून घेता येणं, त्यानुसार स्वतःच्या वागण्यात बदल करून घेणं, मित्रमंडळी बनवता येणं, त्यांना जपणं, कुठे कसं वागावं हे समजणं, वाद सोडवणं हे सगळं यात येतं. मानसशास्त्रज्ञ, टीम लिडर, काऊन्सीलर, सेल्सपर्सन, राजकारणी माणसं वगैरे .
7. Intrapersonal Intelligence :
हे वरच्या प्रकारच्या उलट. हे स्वतःमध्ये हरवलेले असतात. यांना स्वतःच्या विश्वात दंग राहायला आवडतं. स्वतःचे strengths आणि weaknesses यांना माहिती असतात. नवनवीन कल्पना ते मांडतात (पण मोस्टली मनातल्या मनात 😅). विचारवंत, वैज्ञानिक, लेखक अशी माणसंं या प्रकारची बुद्धीमान असतात.
8. Naturalistic Intelligence :
हा प्रकार त्याने जरा उशीरा मांडला. काही लोकांना निसर्ग आवडत असतो. पक्षी, जंगलं, समुद्र, डोंगर, जैवविविधता अशा सगळ्या गोष्टींचे ते चाहते असतात. शहरात फार मन लागत नाही, खेड्याकडे जाऊन मोकळ्या आभाळाखाली चांदण्यात झोपणंं फार आवडत असतं. पर्यावरणतज्ज्ञ, जीवशास्त्रज्ञ, निसर्गप्रेमी, पक्षीप्रेमी वगैरे सगळे लोक यात येतात.
अशा प्रकारे आपली एक बुद्धीमत्ता ओळखली आणि त्यानुसार आपल्या जीवनाची दिशा ठरवली तर आनंदमय होईल सगळं भविष्य. एकापेक्षा जास्त बुद्धीमत्ता असल्यास उत्तमच, मग अशा वेळी भविष्याचा स्कोप अजुन मोठा होतो.
आपल्या शालेय वयात ज्या बॅक बेंचर्सना आपण अभ्यासामुळे, कमी मार्क्स मुळे हलक्यात घेतो ते लोक किती छान खेळाडू, कलाकार असतात हे जरा आठवा. आपल्या एकूणच बोगस शिक्षणव्यवस्थेमुळे कितीतरी लोक depression, न्यूनगंडामध्ये गेले असतील हे सुद्धा आठवा.
त्यामुळे इंटरनेट वर आधीच उपलब्ध असलेली ही माहिती सोप्या शब्दांत इथे मांडण्याचा प्रयत्न करते आहे. वाचकांपैकी कोणाचा फायदा झाला तर मला आनंदच होईल 🖤
लेखन🙏
ॲड.रेवती देव फाटक.
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ENGLISH GRAMMAR
by Prof. Dipak Burhade
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SPOT THE ERRORS...
Correct the mistakes and rewrite the sentences...
1. Although she was unhappy but she said nothing.
2. Because of I liked him, I tried to help him.
3. Because I liked him, so I helped him.
4. So you know, I work very hard.
5. As you know that I like him very much.
6. We came back because of we were short of cash.
7. I have got a friend whom works in a pub.
8. She always thanks me for all the help that I give her it.
9. Because she was depressed and didn’t know what to do.
10. Cook slowly unless ready.
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Answers
1. Although she was unhappy she said nothing. / She was unhappy but she said nothing.
2. Because I liked him, I tried to help him.
3. Because I liked him, I helped him. / I liked him so I helped him.
4. As you know, I work very hard.
5. As you know I like him very much. / You know that I like him very much.
6. We came back because we were short of cash.
7. I have got a friend who works in a pub.
8. She always thanks me for all the help that I give her.
9. Because she was depressed she didn’t know what to do. / She was depressed and didn’t know what to do.
10. Cook slowly until ready.
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शाळा निवडतांना कुठले बोर्ड घ्यावे?
शिक्षण अभ्यासक सचिन उषा विलास जोशी यांचा सकाळ वृत्तपत्रांमधील लेख
पालक शाळा निवडतांना, “बोर्ड कुठले आहे”? हा हमखास प्रश्न विचारतात. इंग्रजी माध्यमाच्या शाळेत नर्सरीमध्ये प्रवेश घेतांना तुमची अमुक अमुक बार्डची शाळा आहे का? नर्सरी पासुनच बोर्डचा अभ्यासक्रम शिकवतात ना..? टिचर्स सुध्दा त्या अमुक अमुक बोर्ड मधुनच पास झाले ना?.. या अण् या संदर्भात असंख्य प्रश्न पालक विचारत असतात. खरं तर त्याचां काही दोष नाही, शिक्षणपध्दतीने समाजात खुप गैरसमज निर्माण केले आहे त्यामुळे हे पालक संभ्रम अवस्थेत असतात. अनेक बोर्ड आणि त्याचा संबंध शैक्षणिक यशस्वीतेशी लावून अनेक गैरसमज निर्माण झाले.
खरंतर बोर्ड लागते आठवीपासून पुढे. कुठलेही बोर्ड फक्त दहावी आणि बारावीची परिक्षा घेत असते. बोर्डचे काम फक्त परीक्षा आयोजीत करणे असते. कुठलेही बोर्ड पाल्याला हुषार करीत नाही. शाळा त्या विद्यार्थ्यावर काय मेहनत घेते. त्यावर त्या मुलाचा/मुलीची शैक्षणिक गुणवत्ता अवलंबुन असते.
सध्या शाळेत प्रवेश घेण्यासाठी पालकांना विविध बोर्डचे पर्याय उपलब्ध आहेत. State बोर्ड, CBSE बोर्ड, ICSE बोर्ड, Cambridge बोर्ड, IB बोर्ड, असे विविध बोर्ड उपलब्ध आहेत. खरंच या सगळ्यांचा अभ्यासक्रम वेगळा असतो का? या सर्वांमध्ये काही फरक आहे का? पहिला मुद्दा म्हणजे, या सर्व बोर्ड मध्ये खुप असा फरक नाही. 80% अभ्यासक्रम हा सर्वांचा सारखाच असतो. मुळात प्रश्न हा आहे की, या सर्व बोर्डचा अभ्यासक्रम कोण ठरवतो? प्रत्येक देशाचा असा एक शैक्षणिक आराखडा असतो. आपल्याही देशाचा राष्ट्रीय शैक्षणिक आराखडा आहे. त्याला NCF National Curriculum Framework असे म्हणतात. त्यांनी वयानुसार मुलांना काय शिकवायचे, वयानुसार कुठले स्कील अपेक्षित आहे, याबाबत मार्गदर्शन केले असते. NCF च्या फ्रेमवर्क नुसार इयत्तेनुसार, वयानुसार अभ्यासक्रम ठरवला जातो. भारतातले आणि भारताबाहेरचे, परंतु जे भारतात शिक्षण देतात ते सर्व बोर्ड NCF च्या फ्रेमवर्क नुसारच अभ्यासक्रम आणि त्यासंदर्भात पाठ्यपुस्तक बनवत असतात. पाठ्यपुस्तक हे NCERT किंवा राज्यात SCERT यांच्या मान्यते नुसार असतात. भारत सरकारने प्राथमिक शिक्षणाचे अभ्यासक्रम संदर्भात पाठ्यपुस्तक आणि त्यासंदर्भात प्रशिक्षणासाठी NCERT ची स्थापना केली आहे. भारतात शाळा दोन प्रकारच्या आहेत. प्रायव्हेट स्कूल आणि गर्व्हरमेंट स्कूल. आठवी पर्यंत कुठले पुस्तक वापरायचे हे शाळा ठरवु शकते. प्रायव्हेट स्कूल NCERT चे किंवा SCERT चे पुस्तक वापरु शकते किंवा प्रायव्हेट पब्लीशरचे ही पुस्तक वापरु शकते. फक्त प्रायव्हेेट पब्लिशरचे पुस्तकांना NCERT ची मान्यता असणे आवश्यक असते. तसेच शाळा स्वत:चे पुस्तक सुध्दा बनवु शकते. याच NCF च्या फ्रेमवर्कनुसार विविध बोर्ड त्यांच्या दहावी आणि बारावीचा अभ्यासक्रम आणि परिक्षा घेत असते. प्रत्येक बोर्डाचे स्वत:चे उदिष्टे असतात. आता प्रश्न हा आहे की, विविध बोर्ड का निर्माण झाले. शिक्षण हा विषय केंद्र आणि राज्य या दोघांच्या अंतर्गत येतो. प्रत्येक राज्याचे स्वत:चे बोर्ड असते. जसे महाराष्ट्रामध्ये SSC बोर्ड (State Secondary Certificate) संपूर्ण भारताचे किंवा केंद्राचे CBSE (Central Board of Secondary Education). इतिहास आणि भूगोल हे दोन विषय सोडले तर सर्व अभ्यासक्रम हा तसा सारखाच आहे. SSC बोर्ड मध्ये महाराष्ट्र बद्दल जास्त माहीती आहे. तसेच राज्याची भाषा शिकविणे अनिवार्य असते. तर CBSE मध्ये संपुर्ण भारताचा इतिहास आणि भूगोलवर भर असतो. खरतर जर पालकांची नोकरीची बदली एका राज्यातून दूसर्या राज्यात होणार असेल तर पालक CBSE बोर्डला प्राधान्य द्यायचे.
या दोन बार्ड व्यतिरीक्त खुप वर्षापासून ICSE बोर्डसुध्दा आहे. Indian Certificate of Secondary Education हे बोर्ड Charitable Society Act नुसार भारत सरकारने मान्यता करुन दिले आहे. हे बोर्ड Aglo Indian Community ने सुरु केले असून जास्तीत जास्त कॉन्व्हेंट स्कूल या बोर्डशी सलग्न आहे. या बार्डचा फोकस इंग्रजी भाषेवरील ज्ञानावर जास्त असतो. तर CBSE बोर्डचा फोकस विज्ञान आणि गणित ज्ञानावर जास्त असतो असे म्हटले जाते. माननीय मनमोहन सिंग जेव्हा वित्तमंत्री होते त्यावेळेस आपण ग्लोबलाझेशन स्विकारले. परदेशी गुंतवणुक वाढली त्याचबरोबर परदेशी नागरीक त्यांच्या कुटुंबासोबत भारतात जास्त प्रमाणात नोकरीसाठी आले. त्यांच्या मुलांवर शैक्षणिक अभ्यासक्रमाची अडचण येवु नये म्हणून IBO (International Baccalaureate Board) यांना निमत्रित करुन IB बोर्ड सुध्दा भारतात आले.
आता तर खुली शैक्षणिक अभ्यासक्रम प्रणाली आहे. केंब्रीज युनिव्हरसीटीचे केंब्रीज बोर्ड म्हणजे IGCSE- International General Certificate of Secondary Education सुध्दा आहे. पण यांना सर्वाना NCF अंतर्गतच अभ्यासक्रम ठरवावा लागतो. अपवाद फक्त इतिहास आणि भूगोल आहे ज्याला EVS असे म्हणतात.
खरतंर शिक्षणाचे एक तत्व आहे. “Near to Far.” जवळापासून लांबपर्यंत शिकण्यातले मुद्दे घेवुन जाणे. IB बोर्डच्या अभ्याक्रमात मुलांना फ्रेंच रिव्ह्युलेशन शिकवले जाते पण नाशिकमध्ये काळाराम मंदिरचा सत्याग्रह माहित नसतो किंवा महाराष्ट्राचा इतिहास माहित नसतो. त्यामुळे हे विद्यार्थी दैनंदिन जीवनात जगतांना कुणाशी कनेक्ट होऊ शकत नाही. असो मुद्दा हा आहे की, सर्व बोर्ड हे बर्याशच्या प्रमाणात सारखेच असतात. कारण गणित व शास्त्र यांच्या संकल्पना या जगात सारख्याच आहे. पायथागोरसची संकल्पना ही सर्व बोर्डमध्ये सारखीच आहे. मग फरक कुठे पडतो. फरक असतो प्रायव्हेट बुक्स पब्लिशर यांच्या अभ्यासक्रमात. NCERT च्या पुस्तकात वयानुसार जेवढे जास्त ज्ञान द्यायला हवे तेवढीच पायथागोरसची संकल्पना पुस्तकात मांडली असते. ती दोन ते तिन पध्दतीने समजावून दिली असते. प्रायव्हेट पब्लिशर यांना पुस्तक पानांची संख्या किती असावी यावर मर्यादा नसते. त्यामुळे ते कुठलीही संकल्पना विविध पध्दतीने आणि आवश्यक नसलेली अधिकची माहीती छापतात. यातील बराच भाग बोर्डाच्या परीक्षेत येणार सुध्दा नसतो. आपल्याला वाटते अमुक अमुक बोर्डाचा अभ्यासक्रम खुप खोलात आहे. तसे नसुन जास्तीची माहिती छापून आधिक पानांचे पुस्तक बनवून पुस्तकांची किंमत पालकांकडून जास्त काढण्यात यावी यासाठी ही उठाठेव असते. पाालकांचा अजून एक प्रश्न असतो.. अमुक अमुक बोर्डाची शैक्षणिक गुणवत्ता चांगली आहे का? पालकांनो, शैक्षणिक गुणवत्ता अवलंबुन असते शाळेवर आणि त्यातील टिचर्सवर. ती शाळा त्या मुलांवर काय मेहनत घेते त्यावर शैक्षणिक गुणवत्ता अवलंबून असते कारण सर्वच पाठ्यपुस्तक हे ज्ञानरचनावादी आहेत. किंबहुना NCF तसेच NCERT यांची सक्त ताकिद असते सर्व बोर्डचे तसेच सर्व प्रायव्हेटबुक यांचे पाठ्यपुस्तक हे ज्ञानरचनावादी शिकवण्याच्या पध्दतीनुसार असावे. अनुभवातुन शिक्षण, कृतीतून शिक्षण विद्यार्थ्यांना मिळावे म्हणून पाठ्यपुस्तकांची व त्यातील धड्यांची रचना तशी केलेली असते. प्रश्न हा आहे की, ती शाळा व त्यातील शिक्षक तो धडा, ती संकल्पना त्या पध्दतीनेच शिकवतात का? जर शिकवत असेल तर त्या शाळेचे किंबहुना त्या शिक्षकांचे कौतुक होणे आवश्यक असते पण आपण श्रेय देतो अमुक अमुक एका बोर्डाला.
पाचवर्षापुर्वी जेव्हा कपील सिब्बल हे शिक्षणमंत्री होते, त्यावेळेस संपुर्ण भारतातून अकारावी आणि बारावीचा अभ्यासक्रम सारखा झाला आहे. तीन वर्षापुर्वीच स्टेटबोर्डने त्याचा संपुर्ण अभ्यासक्रम हा CBSE च्या धरतीवर सारखा केला आहे. मेडीकल, इंजिनीयरींगला प्रवेश घेण्यासाठी होणार्या सर्व प्रवेश परीक्षाचां अभ्यासक्रम सर्व भारतातून कॉमन केला आहे. जो संपुर्णता NCERT च्या पाठ्यपुस्तकावर आधारीत आहे. शिक्षण क्षेत्रामध्ये आमुलाग्र बदल होत आहे. पालक तीन वर्षाच्या पाल्याच्या प्रवेशाला कुठले बोर्ड घेऊ त्याच्या विचारात असतात पण हे तिन वर्षाच्या मुलाला 13 वर्षानंतर बोर्डची परीक्षा द्यायची असते. तो पर्यंत येणार्या 13 वर्षामध्ये शिक्षणात आमुलाग्र बदल होईल. त्यावेळेस बोर्ड ही संकल्पना असेल की नाही हा सुध्दा विचार करण्याचा प्रश्न आहे.
पालकांनो प्री प्रायमरीचा अभ्यासक्रम काय असावा याचा कुठलेही पाठ्यपुस्तक सरकार कडुन, कुठल्याही बोर्डकडुन निश्चित केले नाही. भारतात शिक्षण कायदा हा सहा वर्षाच्या वयापासूनच सुरु होतो. त्यामुळे प्री प्रायमरीला कुठल्याही बोर्डचा अभ्यासक्रम नसतो. ना या शाळा सरकारच्या अंतर्गत येतात. पण आता त्याच्यावर काम चालू आहे आणि येत्या दोन वर्षात महाराष्ट्र सरकार पूर्वप्राथमिक याचा अभ्यासक्रम लवकरच ठरवणार आहे जो कुठल्याही बोर्डाची संबंधित नाही आहे.
महत्वाचा मुद्दा हा आहेे सर्व बोर्ड सारखे आहेत. बोर्ड वरुन पाल्याची शैक्षणिक गुणवत्ता ठरत नसते. गुणवत्ता ठरत असते शाळा, शाळेची फिलॉसॉफी आणि त्याशाळेतील शिक्षक यांच्या मेहनतीवर.
सर्व बोर्ड हे चांगले आहेत. सीबीएससी बोर्ड ने ज्ञानरचनावादी शिक्षणाची सुरुवात त्यांनी केली. आता सर्वच बोर्ड हे ज्ञानरचनावादी पद्धतीने अभ्यासक्रमाची मांडणी करतात. मुद्दा हा आहे की ज्या पद्धतीने मांडणी केलेली आहे तसं ती शाळा किंवा शिक्षकांकडून विद्यार्थ्यांना शिकवते का?
अमुक एक बोर्ड असेल तर विदेशात शिक्षणाच्या संधी उपलब्ध होतात असे म्हटले जाते. पण वस्तुस्थिती तशी नाही. आपण कुठल्याही बोर्ड मधुन शिक्षण घ्या.JRE, SAT यासारख्या परिक्षा देणे गरजेचे असते. बारावी नंतर भारतामध्ये किंवा भारताबाहेर शिक्षण घ्यावयाचे असेल तर सर्व कोर्सेसना त्यांच्या त्यांच्या प्रवेश परीक्षा असतात. बोर्ड पेक्षा बोर्डाचा जो अभ्यासक्रम आहे तो ज्ञानरचनावादाने विद्यार्थ्यांना शिकविला जातो का हे महत्वाचे. विद्यार्थ्यांना अनुभवातून शिक्षण मिळाले तर ते अधिक गुणवत्तापुर्ण होते.
-सचिन उषा विलास जोशी
शिक्षण अभ्यासक
Sachin Usha Vilas Joshi
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शिक्षण व शिक्षक
काय देतो शिक्षक, मुलांना. फक्त शिक्षण?. काय असतो तो मुलांसाठी ??
खूप काही.
कुंभार - मुलांना आकार देणारा. मुलांचे गुण ओळखून त्यांना विविध आकार देणारा, घासून अनुभव व शिस्तिच्या आवेत भाजून पक्क करणारा. उत्तम माणूस घडवून आदर्श नागरिक देशाला देणारा.
लोहार - उपक्रमांची भट्टी भडकवून हट्टी मुलांना नरम करणारा. त्यांना योग्य आकार देऊन धारदार करणारा, जगाच्या पटावर खंबीर उभं करणारा.
सोनार - नरमाईतही नरम गरम राहून आपलं अस्तित्व बावनकशी राखायला शिकवणारा. अनमोलच करुन सोडणारा.
सुतार - त्याच्या शिस्तीने व हळुवारपणाने मुलांच्या गैरवर्तन व गैरव्यवहारांना संयमाचा रंधा मारुन सुबक करणारा. शाहीपण देणारा.
गवंडी - मुलांमधील उत्तमता शोधून त्यांचा सुंदर इमला बनवायला शिकवणारा. अनाकलनीय गुणांची सात आश्चर्याचा नमुना असलेली वास्तू घडवणारा.
बिगारी - उत्तम घडण्यासाठी जे जे हवं ते जमवून त्याला सतत आधार देणारा, प्रसंगी स्वतःला संपवून मुलांच्या मोठेपणाचं प्रचंड कौतुक त्रयस्थपणे करणारा.
शेतकरी - मऊ असली तरी जमीन रुपी मुलांची उत्तम मशागत करणारा. स्वतः एक दाणा असूनही हयातीत असंख्य कणसं तयार करणारा. जगासाठी शास्त्रज्ञ, डॉक्टर, इंजिनिअर एक ना अनेक प्रकारचे पिक उत्तम रितीने घेणारा शाळांचा पर्यायाने जगाचा पोशिंदा.
इंजिनीअर - मुलं कशी घडवायची याचं उत्तम टेक्नीक असणारा. सर्व आघाड्यांवर अग्रेसर राहण्याचं तंत्रज्ञान रुपी ज्ञान देणारा.
वैमानिक - अथांग व अनाकलनीय विश्वात मुक्त संचार करण्यासाठी सशक्त करणारा. शोध व चमत्काराच्या दुनियेत यश मिळवण्याचं बळ देणारा अवलिया.
डॉक्टर - मुलांच्या शारीरिक व मानसिक क्षमता ओळखून त्यांना योग्य ते बाळकडू पाजणारा. सशक्त ताकदीचा व खंबीर मनाचा नागरिक पाळण्यातच पाहणारा मनकवडा.
ड्रायव्हर - आयुष्याची गाडी रुळावरून कधीच घसरु नये म्हणून उत्तम ड्रायव्हिंग व माणूसपण जपणारा चालक बनवणारा ट्रेनर.
कंडक्टर - जीवनरुपी गाडीत मुक्कामाला पोचण्यासाठी कुठल्या गाडीत अचूक चढायचं व
कुठं उतरायचं /थांबायचं याचं मार्गदर्शन करणारा तिकीट चेकर.
चांभार - जीवनातल्या चटक्यांनी खचून न जाता खळाळत्या उत्साहाची कोणती चप्पल हवी हे सुचवून पायाला आरामदायक मार्गाने मार्गक्रमण करुन यशस्वी प्रवासाची शास्वती देणारा वाटसरु.
सैनिक - जगाच्या दुष्टचक्रात न अडकता वाईट गोष्टींपासून परावृत्त होऊन अडीग राहण्यासाठी शुटर घडवणारा फायटर.
शिक्षक - मी मुलांचा मुलं माझी असं सदैव मानणारा. मुलात मुल होऊन रमणारा. त्यांची घरची परिस्थिती संपूर्ण जाणणारा, हळवा होणारा. मुलांना अनेक विषयांची सखोल ओळख देणारा. अनेक कला अवगत करवणारा , त्यात अव्वल करणारा. त्यांना मैदानावर खेळवणारा, व मातीत लोळवणारा. प्रयत्नवादी बनवून कलाकृती घडवण्याची प्रेरणा देणारा. उत्तम श्रोता, वक्ता, कवी, लेखक, वैद्य, जादूगार, नेता, समाजसेवक, या सर्वांबरोबर माणूस घडवणारा एक सच्चा दिलदार. फळाची अपेक्षा न करता कोणत्याही परिस्थितीत स्वतःचे काम चोख बजावणारा एक सर्वज्ञ.
मग जो माणूस घडतो ना तो अद्वितीयच.
हे असतं शाळेत मिळणारं शिक्षण. अतुलनीय, अविश्वसनीय. उत्तम. ते देतो फक्त आणि फक्त शिक्षक. सलाम त्याच्या सेवेला.
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भारतातील अती महत्वाच्या संस्थांची घोषवाक्ये संस्कृत मधील आहेत. आवश्य वाचा. अशी माहीती कोठे वाचावयास मिळणार नाही.
●भारत सरकार👉 सत्यमेव जयते
●लोक सभा👉 धर्मचक्र प्रवर्तनाय
●उच्चतम न्यायालय👉 यतो धर्मस्ततो जयः
●आल इंडिया रेडियो👉 सर्वजन हिताय सर्वजनसुखाय
●दूरदर्शन👉 सत्यं शिवं सुन्दरम्
●गोवा राज्य👉 सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।
●भारतीय जीवन बीमा निगम👉 योगक्षेमं वहाम्यहम्
●डाक तार विभाग👉 अहर्निशं सेवामहे
●श्रम मंत्रालय👉 श्रम एव जयते
●भारतीय सांख्यिकी संस्थान👉 भिन्नेष्वेकस्य दर्शनम्
●थल सेना👉 सेवा अस्माकं धर्मः
●वायु सेना👉 नभःस्पृशं दीप्तम्
●जल सेना👉 शं नो वरुणः
●मुंबई पुलिस👉 सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय
●हिंदी अकादमी👉 अहं राष्ट्री संगमनी वसूनाम्
●भारतीय राष्ट्रीय विज्ञानं अकादमी👉 हव्याभिर्भगः सवितुर्वरेण्यम्
●भारतीय प्रशासनिक सेवा अकादमी👉 योगः कर्मसु कौशलम्
●विश्वविद्यालय अनुदान आयोग👉 ज्ञान-विज्ञानं विमुक्तये
●नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन👉 गुरुर्गुरुतमो धाम
●गुरुकुल काङ्गडी विश्वविद्यालय👉 ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत
●इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय👉 ज्योतिर्व्रणीत तमसो विज्ञानन
●काशी हिन्दू विश्वविद्यालय:👉 विद्ययाऽमृतमश्नुते
●आन्ध्र विश्वविद्यालय👉 तेजस्विनावधीतमस्तु
●बंगाल अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय,
शिवपुर👉 उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत
●गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय👉 आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः
●संपूणानंद संस्कृत विश्वविद्यालय👉 श्रुतं मे गोपाय
●श्री वैंकटेश्वर विश्वविद्यालय👉 ज्ञानं सम्यग् वेक्षणम्
●कालीकट विश्वविद्यालय👉 निर्भय कर्मणा श्री
●दिल्ली विश्वविद्यालय👉 निष्ठा धृति: सत्यम्
●केरल विश्वविद्यालय👉 कर्मणि व्यज्यते प्रज्ञा
●राजस्थान विश्वविद्यालय👉 धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा
●पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय👉
युक्तिहीने विचारे तु धर्महानि: प्रजायते
●वनस्थली विद्यापीठ👉 सा विद्या या विमुक्तये।
●राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद्👉
विद्याsमृतमश्नुते।
●केन्द्रीय विद्यालय👉 तत् त्वं पूषन् अपावृणु
●केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड👉 असतो मा सद्गमय
प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, त्रिवेन्द्रम👉 कर्मज्यायो हि अकर्मण:
●देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर👉 धियो यो नः प्रचोदयात्
●गोविंद बल्लभ पंत अभियांत्रिकी महाविद्यालय, पौड़ी👉 तमसो मा ज्योतिर्गमय
●मदनमोहन मालवीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय गोरखपुर👉 योगः कर्मसु कौशलम्
●भारतीय प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय, हैदराबाद👉 संगच्छध्वं संवदध्वम्
●इंडिया विश्वविद्यालय का राष्ट्रीय विधि विद्यालय👉 धर्मो रक्षति रक्षितः
●संत स्टीफन महाविद्यालय, दिल्ली👉 सत्यमेव विजयते नानृतम्
●अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान👉 शरीरमाद्यं खलुधर्मसाधनम्
●विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, नागपुर👉 योग: कर्मसु कौशलम्
●मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान,इलाहाबाद👉 सिद्धिर्भवति कर्मजा
●बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी👉 ज्ञानं परमं बलम्
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर👉 योगः कर्मसुकौशलम्
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई👉 ज्ञानं परमं ध्येयम्
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर👉 तमसो मा ज्योतिर्गमय
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई👉 सिद्धिर्भवति कर्मजा
●भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की👉 श्रमं विना नकिमपि साध्यम्
●भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद👉 विद्या विनियोगाद्विकास:
●भारतीय प्रबंधन संस्थान बंगलौर👉 तेजस्वि नावधीतमस्तु
●भारतीय प्रबंधन संस्थान कोझीकोड👉 योगः कर्मसु कौशलम्
●सेना ई एम ई कोर👉 कर्मह हि धर्मह
●सेना राजपूताना राजफल👉 वीर भोग्या वसुन्धरा
●सेना मेडिकल कोर👉 सर्वे संतु निरामया ..
●सेना शिक्षा कोर👉 विद्यैव बलम्
●सेना एयर डिफेन्स👉 आकाशेय शत्रुन् जहि
●सेना ग्रेनेडियर रेजिमेन्ट.👉 सर्वदा शक्तिशालिम्
●सेना राजपूत बटालियन👉 सर्वत्र विजये
●सेना डोगरा रेजिमेन्ट👉 कर्तव्यम् अन्वात्मा
●सेना गढवाल रायफल👉 युद्धया कृत निश्चयः
●सेना कुमायू रेजिमेन्ट👉 पराक्रमो विजयते
●सेना महार रेजिमेन्ट👉 यश सिद्धि?
●सेना जम्मू काश्मीर रायफल👉 प्रस्थ रणवीरता?
●सेना कश्मीर लाइट इंफैन्ट्री👉 बलिदानं वीर-लक्ष्यम्?
●सेना इंजीनियर रेजिमेन्ट👉 सर्वत्र
●भारतीय तट रक्षक-वयम् रक्षामः
●सैन्य विद्यालय👉 युद्धं प्रगायय?
●सैन्य अनुसंधान केंद्र👉 बलस्य मूलं विज्ञानम्
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मित्रों!
सिलसिला यहिं खतम नहीं होता,
विदेशी भी हमारे कायल हैं देखो जरा...
●नेपाल सरकार👉 जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी
●इंडोनेशिया-जलसेना 👉 जलेष्वेव जयामहे (इंडोनेशिया) -
पञ्चचित
●कोलंबो विश्वविद्यालय- (श्रीलंका)👉 बुद्धि: सर्वत्र भ्राजते
●मोराटुवा विश्वविद्यालय (श्रीलंका)👉 विद्यैव सर्वधनम्
पेरादे
पञ्चचित
●पेरादेनिया विश्वविद्यालय👉 सर्वस्य लोचनशास्त्रम्
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मित्रों!
संस्कृत और संस्कृति ही भारतीयता का मूल है .. भारत का विकास इसी से संभव है- तो कीजिये अपने गौरव को याद और सिर उठाकर कहिये
"हम भारतीय हैं और संस्कृत हमारी पहचान है, हमें अपने गौरव का अभिमान है।"
भारत माता की जय
जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्
जयहिंद🚩🚩
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परीक्षेत यश आणि .......
जीवनातलं यश यामधील तुलना
.............................. ...............
गणितात पैकीच्या पैकी गुण मिळवणार्या ने गणिततज्ञ व्हावे असे आम्ही म्हणणार नाही. किंबहुना अशा हुशार मुलांचे आपण उद्योगपती व्हावं, गावचा सरपंच किंवा जिल्हा परिषद सदस्य /अध्यक्ष अथवा भारताचा राष्ट्रपती ,पंतप्रधान बनावे असे स्वप्न असू शकते आणि ते पूर्ण होऊ शकते... कारण परीक्षेत अपयश आणि जीवनातले यश यामध्ये बऱ्याच वेळा फरक पडतो....
ज्यांच्या क्रांतिकारक शोधानी विसाव्या शतकाचा चेहरामोहरा बदलला त्या थॉमस अल्वा एडिसन ला तर बुद्धू म्हणुन शाळेतून काढून टाकण्यात आलं होतं.
गुरुदेव रवींद्रनाथ टागोर यांनाही शाळेचा मनःपूर्वक तिटकारा होता. बाराव्या वर्षांनंतर ते शाळेत गेलेच नाहीत .पुढे उच्च शिक्षणासाठी वडिलांनी त्यांना इंग्लंडमध्ये पाठवले ,तरी तिथून येथे पदवी न घेताच परतले .त्यांचं खरं शिक्षण झालं ते निसर्गाच्या सानिध्यात आणि साहित्यकलांच्या सहवासात. त्यातूनच ते महाकवी झाले .आणि नोबेल पारितोषिक पटकावणारे आशियातले पहिले साहित्यिक ठरले .शाळा कॉलेजचे शिक्षण त्यांनी घेतलं नव्हतं तरीही ते शिक्षण क्षेत्रात क्रांती घडवणारे क्रांतीकारक ठरले .
असंच आणखी एक उदाहरण स्वामी विवेकानंद यांचे देता येईल .कारण आता तर स्वामीजींचे महाविद्यालयातील प्रगतीपत्रक उपलब्ध झाले आहे. स्वामीजींच्या चरित्राचे अभ्यासक श्री. शंकर यांनी 'अज्ञात विवेकानंद 'या त्यांच्या पुस्तकात प्रसिद्ध केले आहे की ज्या इंग्रजी भाषेच्या प्रभुत्वाद्वारे स्वामीजींनी इंग्लंड अमेरिकेतील लोकांची मने जिंकली त्या इंग्रजीत त्यांनी फार चांगले गुण मिळवले होते असे दिसत नाही. गणित ,मानसशास्त्र यामध्ये तर ते काठावर पास झाले होते .शिवाय ज्या तत्वज्ञानावर त्यांनी भाषणे दिली त्या तत्वज्ञान आणि तर्कशास्त्र या विषयातही स्वामी स्कॉलर होते असं म्हणता येत नाही .स्वामीजींचे अफाट कर्तुत्व आणि त्यांचे मार्कलिस्ट वरील गुणसंपदा यात फरक आढळतो...... हे गुणपत्रक प्रयत्नपूर्वक मिळवून प्रकाशित करण्यामागचा आपला हेतू स्पष्ट करताना श्री शंकर जी म्हणतात," शाळा- कॉलेजमधील परीक्षेतील गुणांचा आयुष्याच्या परीक्षेतील गुणांशी काहीच संबंध नसतो .हे सिद्ध करणारा हा एक अत्यंत दुर्मिळ परंतु तितकाच बोलका पुरावा ठरावा."




दहावीच्या उत्तीर्ण सर्व विद्यार्थ्यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन?... किती मार्क्स मिळाले हे महत्त्वाचे नाही.... पण तुम्ही सर्वजण नक्कीच जिद्दी, होतकरू ,प्रयत्नशील आहात..... आपला आजचा आनंद जरूर साजरा करा..... पण खरी लढाई आणि यापेक्षा उत्तम संधी पुढील शिक्षणात तुम्हाला नक्कीच मिळेल.... माझी खात्री आहे की तुम्ही खुप खुप प्रयत्न कराल.. जीवनाच्या लढाईत सतत संघर्ष करून यश- अपयशाची तमा न बाळगता.... आहे त्यापेक्षा अजून पुढे जाण्याचा प्रयत्न कराल.. कधीही हिंमत हरू नका
Best luck for future..
सुरक्षित रहा... स्वतःची व इतरांची काळजी घ्या.@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
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*नोकरी करणाऱ्या व्यक्ती तसेच गृहिणी जे एमपीएससी, यूपीएससी इत्यादी स्पर्धा परीक्षांची तयारी करीत आहे अश्या सर्वांसाठी स्पर्धा परीक्षा मार्गदर्शन सत्र*
अभ्यासाचे नियोजन कसे करावे ?
वेळेचे नियोजन कसे करावे ?
सातत्यपूर्ण अभ्यासाची सवय कशी लावावी ?
यांसारख्या अनेक प्रश्नांवर मार्गदर्शन करण्यासाठी *दीपस्तंभ चे यजुर्वेंद्र महाजन* यांचे विशेष सत्र आयोजित करण्यात येत आहे .
दिनांक -31 ऑगस्ट .
वेळ - रात्री नऊ वा.
*सत्रात सहभागी होण्यासाठी* - हे सत्र सर्वांसाठी खुले असून एसएमएस व्दारे नाव नोंदणी करणे आवश्यक आहे.
1.खाली दिलेल्या नंबर वर नाव, पत्ता , ईमेल , मोबाईल नंबर, कोणत्या परीक्षांसाठी तयारी करत आहात ही माहिती पाठवावी.
2.नाव नोंदणी केलेल्या व्यक्तींना मोबाईल वर सत्राची झूम लिंक एसएमएस स्वरूपात पाठवण्यात येईल.
3. नाव नोंदणीसाठी नंबर - 9922004191.
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-संकलन : प्रा. धनंजय भिसे

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