कटु सत्य
_ईसाईयों को इंग्लिश आती है_
_वो बाइबिल पढ लेते है_
_उधर मुस्लिम को उर्दू आती है_
_वो कुरान शरीफ़ पढ लेते हैं_
_सिखों को गुरबानी का पता है_
_वो श्री गुरू ग्रन्थसाहिब_
_पढ लेते है ।_
_हिन्दूओको संस्कृत नही आती_
_वो ना वेद पढ पाते है_
_और न ही उपनिषद ।_
_इस से बडा दुर्भाग्य_
_और क्या हो सकता है हमारा_


संस्कृत ही विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है इसे अवश्य सीखें
प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र संग्रह
*प्रात: कर-दर्शनम्
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_*_कराग्रे वसते लक्ष्मी_
_करमध्ये सरस्वती।_
_करमूले तू गोविन्दः_
_प्रभाते करदर्शनम्॥_
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पृथ्वी क्षमा प्रार्थना
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पृथ्वी क्षमा प्रार्थना
_*_समुद्र वसने देवी_
_पर्वत स्तन मंडिते।_
_विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं_
_पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥_
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त्रिदेव सह नवग्रह स्मरण
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त्रिदेव सह नवग्रह स्मरण
_*_ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी_
_भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।_
_गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥_
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स्नान मन्त्र
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स्नान मन्त्र
_*_गंगे च यमुने चैव_
_गोदावरी सरस्वती।_
_नर्मदे सिन्धु कावेरी_
_जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥_
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सूर्यनमस्कार
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सूर्यनमस्कार
_*_ॐ_
_सूर्य आत्माजगतस्तस्य_
_उषश्च आदित्यस्य नमस्कारं_
_ये कुर्वन्ति दिने दिने।_
_दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि_
_शोक विनाशनम्_
_सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥_
_ॐ मित्राय नम:_
_ॐ रवये नम:_
_ॐ सूर्याय नम:_
_ॐ भानवे नम:_
_ॐ खगाय नम:_
_ॐ पूष्णे नम:_
_ॐ हिरण्यगर्भाय नम:_
_ॐ मरीचये नम:_
_ॐ आदित्याय नम:_
_ॐ सवित्रे नम:_
_ॐ अर्काय नम:_
_ॐ भास्कराय नम:_
_ॐ श्री सवितृरे_
_ॐ श्री सूर्यनारायणाय नम:_
_आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर।_
_दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥_
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दीप दर्शन
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दीप दर्शन
_*_शुभं करोति कल्याणम्_
_आरोग्यम् धनसंपदा।_
_शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते॥_
_दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः।_
_दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥_
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गणपति स्तोत्र
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गणपति स्तोत्र
_*_गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:।_
_द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥_
_विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।_
_द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥_
_विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्।_
_विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय।_
_लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥_
_नागाननाय श्रुतियज्ञ विभूषिताय।_
_गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥_
_शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।_
_प्रसन्नवदनं ध्यायेत्_
_सर्वविघ्नोपशान्तये॥_
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आदिशक्ति वंदना
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आदिशक्ति वंदना
_*_सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।_
_शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥_
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शिव स्तुति
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शिव स्तुति
_*_कर्पूर गौरम करुणावतारं_
_संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।_
_सदा वसंतं हृदयार विन्दे_
_भवं भवानी सहितं नमामि॥_
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विष्णु स्तुति
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विष्णु स्तुति
_*_शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं_
_विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।_
_लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्_
_वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥_
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श्री कृष्ण स्तुति
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श्री कृष्ण स्तुति
_*_कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम।_
_नासाग्रे वरमौक्तिकम करतले, वेणु करे कंकणम॥_
_सर्वांगे हरिचन्दनम सुललितम, कंठे च मुक्तावलि।_
_गोपस्त्री परिवेश्तिथो विजयते, गोपाल चूडामणी॥_
_मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्।_
_यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥_
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श्रीराम वंदना
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श्रीराम वंदना
_*_लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।_
_कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥_
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श्रीरामाष्टक
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श्रीरामाष्टक
_*_हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा।_
_गोविन्दा गरुड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा॥_
_हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते।_
_बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्॥_
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एक श्लोकी रामायण
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एक श्लोकी रामायण
_*_आदौ रामतपोवनादि गमनं_
_हत्वा मृगं कांचनम्।_
_वैदेही हरणं जटायु मरणं_
_सुग्रीवसम्भाषणम्॥_
_बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्।_
_पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद्घि श्री रामायणम्॥_
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सरस्वती वंदना
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सरस्वती वंदना
_*_या कुन्देन्दुतुषारहारधवला_
_या शुभ्रवस्त्रावृता।_
_या वींणावरदण्डमण्डितकरा_
_या श्वेतपदमासना ॥_
_या ब्रह्माच्युत शङ्कर _प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।_
_सा माम पातु सरस्वती भगवती_
_निःशेषजाड्याऽपहा॥_
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हनुमान वंदना
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हनुमान वंदना
_*_अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्।_
_दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्।_
_सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्।_
_रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥_
_मनोजवं मारुततुल्यवेगम_
_जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।_
_वातात्मजं वानरयूथमुख्यं_
_श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥_
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स्वस्ति-वाचन
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स्वस्ति-वाचन
_*_ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्धश्रवाः_
_स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।_
_स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्ट्टनेमिः_
_स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥_
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शांति पाठ
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शांति पाठ
_*_ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।_
_पूर्णस्य पूर्णमादाय_ _पूर्णमेवावशिष्यते॥_
_ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:,_
_पृथिवी शान्तिराप: शान्ति: रोषधय: शान्ति:।_
_वनस्पतय: शान्ति: विश्वे देवा: शान्तिः ब्रह्म शान्ति:_
_सर्व (गुँ ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥_
_॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥_






_निवेदन_
_बहुत ही सुंदर संग्रह_
_इसे हर हिन्दू को अपने 'Saver' में डाले या प्रिंट आउट ले ।_
_ऐसा संग्रह सरलता से नही मिलता ।_
_एक प्रति परिवार के बच्चों को भी दें!_
बहुत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक। कृपया सब भाइयों को उपलब्ध करायें। युवा पीढ़ी (बच्चों) को विशेष रूप से दें और उन्हें इसे पढने हेतु प्रेरित भी करें।
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