*_कुदरत का कहर भी जरूरी था साहब, वरना हर कोई खुद को खुदा समझ रहा था_*
*_जो कहते थे कि मरने तक की फुरसत नहीं है, वे आज मरने के डर से फुरसत में बैठे हैं_*
*_माटी का संसार है खेल सके तो खेल, बाजी रब के हाथ है पूरा विज्ञान फेल....!!_*
*_मशरूफ थे सारे अपनी जिंदगी की उलझनों में, जरा सी जमीन क्या खिसकी कि सबको ईश्वर याद आ गया_*
*_ऐसा भी आएगा वक्त पता नहीं था, इंसान डरेगा इंसान से ही पता नहीं था_*
*_Take Care & Happy Morning_*


No comments:
Post a Comment